बरेली (जेएनएन): संस्कृति आर्ट्स की ओर से रोटरी भवन में शब्दोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने देर रात तक शायरी का लुत्फ उठाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंडलायुक्त डॉ. पीवी जगमोहन, विशिष्ट अतिथि पीलीभीत के डीएम डॉ. अखिलेश मिश्र, अंदाज़-ए-लखनऊ के संस्थापक मिराज हैदर ने किया। इस मौके पर शारिक कैफी ने 'मौत ने सारी रात हमारी नब्ज टटोली, ऐसा मरने का माहौल बनाया हमने..' शायरी प्रस्तुत की। भोपाल से आई शायरा नुसरत मेहदी ने पढ़ा कि 'आप शायद भूल बैठे हैं यहां मैं भी तो हूं, इस जमी और आसमां के दरमियां मैं भी तो हूं ..' , लखनऊ से आये डॉ. तारिक कमर 'अपने माहौल में जिंदा भी थे ताबिंदा भी , कितने मायूस हैं गुलदान में रक्खे हुए फूल..' रचना पेश की, दिल्ली से आए डॉ. मोइन शादाब ने 'उतारा जाता था सदका हमारी जान का भी, हमारे दम से भी मंसूब चाहतें थीं बहुत..' शायरी प्रस्तुत की, बरेली से शायरा सिया सचदेव ने पढ़ा कि 'इससे पहले की राब्ता टूटे, मैंने ख़ुद कह दिया ख़ुदा हाफिज..' रचना प्रस्तुत की, बदायूं से आयीं डॉ. सोनरूपा विशाल ने पढ़ा कि 'सबेरे कि थकन आंखों से बोली, ये सोना तो कोई सोना नहीं था..' शायरी प्रस्तुत की। इसके अलावा बरेली के शायर सचिन अग्रवाल, अमित शर्मा मीत ने भी अपनी रचना पढ़कर माहौल को खुशनुमा बनाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल अवस्थी ने किया। मुख्य बिन्दु :
भारत में मुस्लिमों को कोई डर नहीं : मदनी
यह भी पढ़ें
-संस्कृति आर्ट्स की ओर से शब्दोत्सव का किया गया आयोजन
-रोटरी भवन में देर रात तक शायरी का लोगों ने उठाया लुत्फ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंडलायुक्त डॉ. पीवी जगमोहन, विशिष्ट अतिथि पीलीभीत के डीएम डॉ. अखिलेश मिश्र, अंदाज़-ए-लखनऊ के संस्थापक मिराज हैदर ने किया। इस मौके पर शारिक कैफी ने 'मौत ने सारी रात हमारी नब्ज टटोली, ऐसा मरने का माहौल बनाया हमने..' शायरी प्रस्तुत की। भोपाल से आई शायरा नुसरत मेहदी ने पढ़ा कि 'आप शायद भूल बैठे हैं यहां मैं भी तो हूं, इस जमी और आसमां के दरमियां मैं भी तो हूं ..' , लखनऊ से आये डॉ. तारिक कमर 'अपने माहौल में जिंदा भी थे ताबिंदा भी , कितने मायूस हैं गुलदान में रक्खे हुए फूल..' रचना पेश की, दिल्ली से आए डॉ. मोइन शादाब ने 'उतारा जाता था सदका हमारी जान का भी, हमारे दम से भी मंसूब चाहतें थीं बहुत..' शायरी प्रस्तुत की, बरेली से शायरा सिया सचदेव ने पढ़ा कि 'इससे पहले की राब्ता टूटे, मैंने ख़ुद कह दिया ख़ुदा हाफिज..' रचना प्रस्तुत की, बदायूं से आयीं डॉ. सोनरूपा विशाल ने पढ़ा कि 'सबेरे कि थकन आंखों से बोली, ये सोना तो कोई सोना नहीं था..' शायरी प्रस्तुत की। इसके अलावा बरेली के शायर सचिन अग्रवाल, अमित शर्मा मीत ने भी अपनी रचना पढ़कर माहौल को खुशनुमा बनाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल अवस्थी ने किया। मुख्य बिन्दु :
भारत में मुस्लिमों को कोई डर नहीं : मदनी
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