- शहर के नालों की मरम्मत कराकर आखिरी छोर पर लगाया जाएगा जाल
- शहर के नालों की मरम्मत कराकर आखिरी छोर पर लगाया जाएगा जाल - नगर निगम ने चिह्नित किए 17 नाले
- नगर निगम ने चिह्नित किए 17 नाले, नदी में नहीं गिरते सीधे
जागरण संवाददाता, बरेली : नगर निगम ने रामगंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कवायद शुरू की है। शहर के ऐसे नालों को चिह्नित किया है जिनका पानी अन्य नदी-नालों से होता हुआ रामगंगा में जाता है। इन नालों के आखिरी छोर की मरम्मत कराकर वहां बड़ा जाल लगाया जाएगा। इससे नदियों तक शहर को ठोस अपशिष्ट नहीं पहुंचेगा।
शहर में करीब डेढ़ दर्जन नाले करीब पांच किलोमीटर लंबे हैं। इन नालों में शहर के कई मुहल्लों का पानी बहता है। सबसे बड़ा नाला सिकलापुर से शुरू होकर सुभाषनगर में राजीव कॉलोनी होता हुआ रेलवे लाइन की ओर जाता है। पिछले महीने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने इस नाले का निरीक्षण किया था। उसके बाद नगर निगम ने नाले को आखिरी छोर तक बनाने का काम शुरू किया। इस नाले का पानी आगे तालाब में जाता है। वही, शहर के कई नालों का पानी ग्रामीण क्षेत्रों से होकर रामगंगा में पहुंचता है। इन नालों से ठोस कूड़ा भी रामगंगा तक चला जाता है। रामगंगा में ठोस अपशिष्ट जाने से रोकने के लिए नगर निगम ने ऐसे 17 नालों को चिह्नित किया है। इन नालों के आखिरी छोर की मरम्मत कराकर नगर निगम वहां जाल लगाने की तैयारी में है। इसके लिए नगर आयुक्त ने आदेश जारी कर दिया है। वर्जन
शहर के नालों से ठोस अपशिष्ट पानी के जरिए रामगंगा में जाने से रोका जाएगा। इसके लिए 17 नाले चिह्नित किए गए हैं, जिनके आखिरी छोर की मरम्मत कराकर वहां जाल लगाया जाएगा।
आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
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